
बेतिया, बिहार: पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया में 25 वर्षीय दिलशाद अंसारी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद मामला गरमा गया है। घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली और हिरासत में हुई मौत की परिस्थितियों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में सहोदरा थाने के SHO समेत छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है।
परिजनों के अनुसार, 12 अक्टूबर की रात पुलिस दिलशाद को उसके घर से उठाकर ले गई थी। परिवार का आरोप है कि कुछ ही घंटों बाद उन्हें उसकी मौत की सूचना मिली। दिलशाद के पिता ने पुलिसकर्मियों पर मारपीट करने का आरोप लगाया है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
वहीं, पुलिस का दावा है कि NDPS एक्ट के एक पुराने मामले में गिरफ्तार दिलशाद को थाने ले जाया जा रहा था, तभी वह चलती गाड़ी से कूद गया। पुलिस के मुताबिक, इस दौरान उसके सिर में गंभीर चोट लगी, जिसके बाद उसकी मौत हो गई। हालांकि, घटना की वास्तविक परिस्थितियों को लेकर परिजनों के आरोप और पुलिस के दावे अलग-अलग हैं।
इस मामले पर पूर्व राज्यसभा सांसद अली अनवर ने जांच की मांग की है। वहीं, बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी मृतक के परिजनों से बातचीत की है।
अब इस मामले में CCTV फुटेज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच अहम मानी जा रही है। जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा कि दिलशाद की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
दिलशाद के परिवार को न्याय मिलने और घटना की सच्चाई सामने आने का इंतजार है। अब सवाल यह है कि जांच कितनी निष्पक्ष और पारदर्शी होगी तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी।




