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भारत की जनगणना 2027 को कैबिनेट की मंजूरी, पहली बार पूरी तरह डिजिटल गिनती

केंद्र सरकार ने भारत की जनगणना 2027 के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस ऐतिहासिक योजना को औपचारिक स्वीकृति दी गई। इस विशाल अभियान पर लगभग ₹11,718 करोड़ खर्च होने का अनुमान है।

क्या-क्या नया होगा इस जनगणना में?

1️⃣ भारत की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना

जनगणना 2027 अब कागज़ पर नहीं, बल्कि मोबाइल ऐप और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए की जाएगी। इससे डेटा अधिक सटीक और तेजी से संकलित हो सकेगा।

2️⃣ रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम (CMMS)

पूरी प्रक्रिया की निगरानी Census Management & Monitoring System (CMMS) नामक विशेष पोर्टल से की जाएगी।
इससे डेटा संग्रह, प्रगति और रिपोर्टिंग का रियल-टाइम ट्रैक रखा जा सकेगा।

3️⃣ Self-Enumeration का विकल्प

नागरिक पहली बार खुद भी अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे।
यह सुविधा बेहद उपयोगी होगी—

विदेश में रहने वाले नागरिकों

शहरों में कामकाजी परिवारों

और अधिक गोपनीयता चाहने वालों के लिए


4️⃣ जाति गणना भी शामिल

जनगणना 2027 में कास्ट-सर्वे (जाति आधारित गणना) भी शामिल होगा।
यह सामाजिक-आर्थिक नीतियों और कल्याण योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करेगा।

5️⃣ 30 लाख जनगणना कर्मी मैदान में उतरेंगे

इस अभियान में शामिल होंगे—

गणनाकर्ता

पर्यवेक्षक

मास्टर ट्रेनर

डेटा अधिकारी


यह अब तक की सबसे बड़ी मानव-संपर्क आधारित डिजिटल प्रक्रिया होगी।




क्यों है यह जनगणना खास?

भारत में पिछली जनगणना 2011 में हुई थी। 2021 की जनगणना COVID-19 के कारण टल गई थी।
इसलिए 2027 की गिनती—

देश की आबादी

सामाजिक-आर्थिक स्थिति

जातीय वितरण

शहरीकरण

रोजगार

और संसाधनों की मांग


का सबसे महत्वपूर्ण आधार बनेगी।

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