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पाकिस्तान–सऊदी रक्षा समझौता और परमाणु छाते की राजनीति: बदलती वैश्विक सुरक्षा तस्वीर

पिछले साल सितंबर में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच एक अहम रक्षा समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत यदि किसी एक देश पर हमला होता है, तो उसे दूसरे देश पर हमला माना जाएगा—यानी सामूहिक सुरक्षा की स्पष्ट प्रतिबद्धता।

सूत्रों के अनुसार, तुर्की भी इसी तरह के रक्षा गठबंधन में शामिल होने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि क्षेत्रीय और वैचारिक आधार पर नए सुरक्षा गठजोड़ उभर रहे हैं।

इस खबर का बड़ा निहितार्थ आज के वैश्विक हालात में साफ़ दिखाई देता है। मौजूदा दौर में केवल परमाणु शक्ति ही कई देशों के लिए वास्तविक सुरक्षा की गारंटी बनती जा रही है। दुनिया वेनेज़ुएला को देख चुकी है और ईरान को देख रही है—जहाँ अंतरराष्ट्रीय क़ानून और संस्थाएँ किसी देश की रक्षा करने में अक्सर असमर्थ साबित हुई हैं।

इसी संदर्भ में यह समझना ज़रूरी है कि क्यों कई इस्लामिक देश पाकिस्तान के परमाणु छाते के नीचे आने की सोच रहे हैं। यह केवल रणनीतिक साझेदारी नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक शक्ति-संतुलन में निरोध (deterrence) की तलाश का संकेत है।

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