मोदी और पुतिन ने रेंज रोवर और मर्सिडीज़ छोड़कर फॉर्च्यूनर में क्यों की यात्रा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान एक दृश्य सबसे ज्यादा चर्चा में रहा— दोनों नेता रेंज रोवर या मर्सिडीज़ जैसी प्रोटोकॉल कारों के बजाय Toyota Fortuner में बैठे नजर आए।
पहली नज़र में यह सिर्फ एक गाड़ी बदलने जैसा लगा, लेकिन कूटनीति की भाषा में यह निर्णय एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।
रेंज रोवर और मर्सिडीज़ क्यों नहीं?
भारत में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के लिए आमतौर पर ये गाड़ियां इस्तेमाल होती हैं:
Range Rover Sentinel
Mercedes-Maybach S600 Guard
ये दोनों कारें हाई-लेवल बुलेटप्रूफ सुरक्षा मानक वाली हैं और भारतीय प्रोटोकॉल में शामिल हैं।
लेकिन इनकी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि—
Range Rover → ब्रिटिश ब्रांड (हालाँकि मालिक भारतीय Tata Motors है, पर उत्पादन यूरोप में होता है)
Mercedes → जर्मन/यूरोपीय ब्रांड
रूस इस समय यूरोपीय यूनियन और NATO देशों के खिलाफ अपनी रणनीतिक स्थिति में है और यूरोपीय उत्पादों का खुला समर्थन नहीं करता।
ऐसे में रूस के राष्ट्रपति को यूरोपियन कार में बैठाना कूटनीतिक रूप से असहज हो सकता था।
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फिर Toyota Fortuner ही क्यों?
Fortuner एक जापानी ब्रांड है—और रूस का जापान से विवाद तो है, लेकिन दोनों देशों के बीच यूरोप जैसा राजनीतिक बहिष्कार नहीं है।
इसके अलावा Fortuner:
Armoured (सुरक्षा-ग्रेड संस्करण) में उपलब्ध होती है
भारत में ही व्यापक रूप से उपयोग में आती है
VIP protection protocol में पहले भी उपयोग की जाती रही है
इसलिए पुतिन की सुरक्षा, राजनीतिक संकेत और भारतीय व्यवस्था—तीनों के हिसाब से यह एक संतुलित विकल्प था।
यह सिर्फ गाड़ी नहीं, एक अंतरराष्ट्रीय संकेत था
Modi–Putin का Fortuner में साथ बैठना दुनिया को यह संदेश देता है कि—
> भारत अपनी कूटनीति में लचीला है, लेकिन वैश्विक समीकरणों और प्रतिबंधों के प्रति सजग है।
साथ ही यह भी संकेत है कि भारत किसी भी शक्ति ब्लॉक का अंधा अनुयायी नहीं, बल्कि अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर चलता है।
मोदी और पुतिन का फॉर्च्यूनर में बैठना सिर्फ एक सुरक्षा निर्णय या वाहन बदलाव नहीं था—
यह जियोपॉलिटिक्स, इकोनॉमिक संकेत और कूटनीतिक संदेश का संयोजन था।
कभी-कभी अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कार भी भाषा बोलती है — और दुनिया समझ जाती है।
